आज रंगनाथन सोसाइटी फॉर सोशल वेलफयर एंड लाइब्रेरी डेवलपमेंट: "प्रोत्साहन चैरिया" की तरफ से मुझे नीमका गांव के प्राथमिक विद्यालय
में छात्र व् छात्रों के प्रमाणपत्र वितरण सम्हारो में जाने का अवसर मिला! आज मैं
नीमका गांव के इतने प्यारे प्यारे बच्चो से मैं मिल पाई हूँ इसके लिए मैं बेमटेक
फाउंडेशन और रंगनाथन सोसाइटी का ह्रदय से धन्यवाद करती हूँ !
चलो अब मैं आपके साथ अपना आज का प्रथम अनुभव
साझा करती हूँ !
आज से दो दिन पहले जब मुझसे नीमका गांव जाने के लिए पूछा तो मैंने कहा हाँ मै वहाँ जाना चाहूँगीं और फिर अगले ही दिन समय कुछ ३ बजे के करीब रहा होगा, कहा गया कि एक बार सोच लो वहाँ पर गर्मी बहुत होगी बाद में मत कहना कि हम तो गर्मी में झुलस गए! एक बार तो लगा कही मैंने गलत हाँ तो नहीं भर दी वहाँ पर जाने के लिए फिर सोचा देखते है क्या होता है ! आज जैसे ही मैं वहाँ पहुंची और जब नीमका गांव के बच्चो से मिली तो मेरा अनुभव कुछ और ही था ! ऐसा मैंने पहले कभी महसूस नहीं किया था जैसा मैंने आज महसूस किया था ! वो बच्चे इतने मासूम है कि मैं उनको देखती ही रह गयी ! आज सच मैं ऐसा लगा की बच्चो के साथ मैं भी बच्ची बन गयी हूँ ! मैंने बच्चों के साथ डांस किया ! जब तक मैं बच्चो के साथ थी तब तक मैं अपनी सारी चिंताओं से बहुत दूर थी ! उसके बाद हमने उन बच्चों को प्रमाण पत्र दिए ! उन छोटे छोटे बच्चों का डांस , उनका गाना सुनाने का तरीका बहुत ही मनमोहक था उसको शब्दों में बया नहीं किया जा सकता है ! बच्चे अपनी छोटी छोटी चीजों पर किस प्रकार खुश होते है ये कोई सीखना चाहता है तो बच्चो से सीखे ! जैसे आज मैंने सीखा है की किसी भी हाल में बस खुश रहो क्योकि ख़ुशी तो हमारे सब के पास है बस उसको जीना पड़ता है ! सही में मैंने नेहरू चाचा के बारे में बस सुना था पर आज मैंने साक्षात्कार देख भी लिया ऋषि सर उन बच्चो के लिए चाचा नेहरू है ! जिस प्रकार वो सारे बच्चे अपनी बातें मनवा लेते है उस प्रकार कोई नहीं मनवा सकता है क्योकि उनके सामने हर कोई नहीं बोल पता है ! लेकिन बच्चों ने तो अपने घूमने जाने के कार्यकर्म की भी हाँ भरवा ही ली थी और मुझे ऐसा लगता है बिमटेक फाउंडेशन , रंगनाथन सोसाइटी कभी नीमका गांव के प्रोत्साहन चैरिया के किसी भी काम को मना नहीं कर पाएंगे ! इन सब में बच्चो के साथ फोटो खींच वाते हुए कब वहाँ से जाने का समय हो गया पता ही नहीं चला ना कोई गर्मी का अहसास हुआ बस अंत तक एक भरपूर आनंद का अहसास होता रहा ! इस प्रकार आज का अनुभव मेरा बड़ा ही शानदार रहा है ! उसको मैं कभी भविष्य में भूल नहीं पाऊँगी ! मैं बिमटेक फाउंडेशन और रंगनाथन सोसाइटी से विनती करती हूँ कि मुझे आगे भी नीमका गांव के प्रोत्साहन चैरिया के कार्यकर्म में जाने का मौका दे, क्योकि मुझे अब इंतिजार रहेगा कि मैं वहाँ अब कब जाउंगी बच्चो से कब मिलूंगी!
आज से दो दिन पहले जब मुझसे नीमका गांव जाने के लिए पूछा तो मैंने कहा हाँ मै वहाँ जाना चाहूँगीं और फिर अगले ही दिन समय कुछ ३ बजे के करीब रहा होगा, कहा गया कि एक बार सोच लो वहाँ पर गर्मी बहुत होगी बाद में मत कहना कि हम तो गर्मी में झुलस गए! एक बार तो लगा कही मैंने गलत हाँ तो नहीं भर दी वहाँ पर जाने के लिए फिर सोचा देखते है क्या होता है ! आज जैसे ही मैं वहाँ पहुंची और जब नीमका गांव के बच्चो से मिली तो मेरा अनुभव कुछ और ही था ! ऐसा मैंने पहले कभी महसूस नहीं किया था जैसा मैंने आज महसूस किया था ! वो बच्चे इतने मासूम है कि मैं उनको देखती ही रह गयी ! आज सच मैं ऐसा लगा की बच्चो के साथ मैं भी बच्ची बन गयी हूँ ! मैंने बच्चों के साथ डांस किया ! जब तक मैं बच्चो के साथ थी तब तक मैं अपनी सारी चिंताओं से बहुत दूर थी ! उसके बाद हमने उन बच्चों को प्रमाण पत्र दिए ! उन छोटे छोटे बच्चों का डांस , उनका गाना सुनाने का तरीका बहुत ही मनमोहक था उसको शब्दों में बया नहीं किया जा सकता है ! बच्चे अपनी छोटी छोटी चीजों पर किस प्रकार खुश होते है ये कोई सीखना चाहता है तो बच्चो से सीखे ! जैसे आज मैंने सीखा है की किसी भी हाल में बस खुश रहो क्योकि ख़ुशी तो हमारे सब के पास है बस उसको जीना पड़ता है ! सही में मैंने नेहरू चाचा के बारे में बस सुना था पर आज मैंने साक्षात्कार देख भी लिया ऋषि सर उन बच्चो के लिए चाचा नेहरू है ! जिस प्रकार वो सारे बच्चे अपनी बातें मनवा लेते है उस प्रकार कोई नहीं मनवा सकता है क्योकि उनके सामने हर कोई नहीं बोल पता है ! लेकिन बच्चों ने तो अपने घूमने जाने के कार्यकर्म की भी हाँ भरवा ही ली थी और मुझे ऐसा लगता है बिमटेक फाउंडेशन , रंगनाथन सोसाइटी कभी नीमका गांव के प्रोत्साहन चैरिया के किसी भी काम को मना नहीं कर पाएंगे ! इन सब में बच्चो के साथ फोटो खींच वाते हुए कब वहाँ से जाने का समय हो गया पता ही नहीं चला ना कोई गर्मी का अहसास हुआ बस अंत तक एक भरपूर आनंद का अहसास होता रहा ! इस प्रकार आज का अनुभव मेरा बड़ा ही शानदार रहा है ! उसको मैं कभी भविष्य में भूल नहीं पाऊँगी ! मैं बिमटेक फाउंडेशन और रंगनाथन सोसाइटी से विनती करती हूँ कि मुझे आगे भी नीमका गांव के प्रोत्साहन चैरिया के कार्यकर्म में जाने का मौका दे, क्योकि मुझे अब इंतिजार रहेगा कि मैं वहाँ अब कब जाउंगी बच्चो से कब मिलूंगी!
धन्यवाद
पूजा गौतम